Tuesday, February 9, 2016

चंगु - मंगू और टीवी सीरियल (व्यंग)

चंगु - मंगू और टीवी सीरियल (व्यंग)


चंगु और मंगू एक छोटेसे गाँव में रहते थे ! खेत में मजूरी करते थे ! पढ़े लिखे नहीं थे ! गरीबी और महंगाई की मार से परेशां थे ! एक दिन उन्हों ने आपस में चर्चा की कि इन परेशानियों का हल कैसे लाया जाय ! इस चर्चा का ब्यौरा निम्न लिखित है !

·         चंगु --- यार मंगू बड़ी परेशानी है, एक तो हम बेकार है- सिर्फ मजूरी कर के पेट पालते हैं-- तिसपर महगाई इतनी बढ़ गई है की पूरा ही नहीं होता- दुखी हो गया हूँ यार !
·         मंगू --- बात तो तेरी बराबर है -- पर दुखी होने से कोई काम थोडेही चलता है -- कुछ कुछ करना तो पडेगा -- और करना भी चाहिए ! मैं भी तो बेकार ही हूँ, मैं भी मजूरी करता हूँ !
·         चंगु --- पर यार तेरी बात सोला आने सच है, कुछ करना चाहिए -- पर हम तो अनपढ़ गंवार हैं कर भी क्या सकते हैं ? तू ही कुछ आईडीया बता !
·         मंगू --- मैं तो सात क्लास फ़ैल हूँ -- पढ़ा लिखा हूँ -- हिंदी लिखना जानता हूँ -- चलो मिल कर टीवी सिरिअल की कहानी बनाते हैं ?
·         चंगु --- क्या टीवी सीरियल? हमारे पास इतनी नोलेज कहाँ है ?
·         मंगू --- बड़ी बुरी आदत है तेरी -- बात काटता है -- अरे हम कहानी लिखेंगे और टीवी वालों को बेचेंगे! सीरियल की कहानी में कोई नोलेज की जरूरत थोड़े ही है--कोई भी कर सकता है ये तो!
·         चंगु -- ओके चल बता क्या प्लान है तेरा?
·         मंगू देख बेसिक कास्ट --- एक हीरो / एक हिरोइन / हिरोइन की सहेलियां / हिरोइन के माँ बाप / हीरो के दोस्त हीरो के माँ बाप / एक विलेन और विलेन की गुंडा जमात / ये तो हो गई बेसिक कास्ट |
·         फिर सपोर्ट में पुलिस वाले / कोर्ट कचहरी वाले वकील, जज / मीडिया के पत्रकार इत्यादि ! इस से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए ! अच्छी खासी महीने से दो साल तक चलने वाली सीरीयल बन सकती है | इस से अधिक चलने वाली बनानी हो तो कास्ट में जंगली जानवर घुसालो ! ख़ास कर के गाँव के सपेरे से मिलकर कुछ सांप सलिटे ईकठ्ठा कर लो और कास्ट में डालो ! साथ साथ में भूत प्रेत और डायन इत्यादि डालो! लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए जंतर - मंतर - जादू - टोना - झाड- फूंक इत्यादि अति आवश्यक होता है ! इसमें चूक नहीं होनी चाहिए वर्ना अछि - खासी कहानी कि रेड पिट जाती है और मन वांछित टी-आर-पी नहीं मिल पाती !
·         चंगु --- यार बड़ी माकूल बात कही है तुने ! कुछ मैं भी आइडिया दूं?
·         मंगू --- हाँ हाँ बोल ना |
·         चंगु --- यार जंतर - मंतर - जादू - टोना - झाड- फूंक इत्यादि के साथ साथ हमे मदारी, तांत्रिक ओर अघोरियों की ज़रूरत भी तो पड़ेगी वरना कहानी खीचेगी कैसे?
·         मंगू --- अरे मेरे यार क्या माकूल बात कही है तूने भई वाह मज़ा आएगा| तब तो ये भी करना ही पड़ेगा! इन सब  से ख़ास कर के आज के पढ़े लिखे कहलानेवाले वर्ग के लोग बहुत चाव से देखते हैं और भंगार से भंगार सीरियल कि टी-आर-पी भी तगड़ी रहती है ! -- हम बेपढ़े गंवार तो इन चीजों में विशवास अब कहाँ करते हैं -- जमाने साथ हम तो कितने बदल गए -- पर पढ़े लिखे लोग अभी भी वहीँ के वहीँ हैं ! चलो भगवान् का नाम ले कर हम लोग नए काम का श्रीगणेश करे ! काम शुरूं करें |

·         चंगु --- ये तो शुरूवात है, आगे आगे देखिए होता है क्या ....


ठाकोर जोशी

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